Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 72, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 72, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 72 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
कालपाकचलन्मूला जगत्खण्डफलालयाः ।
प्रशान्तपवनाधारा विमानावलयोऽपतन् ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस भूखण्ड मेँ जो पुण्यफल कमाया
जाता है, उसको भोगने के लिए स्थान एक विमान हैं । इन विमानों का उपभोग करने में
कारणभूत कर्मरूप मूल कालविपाक से कट गया ओर आधारभूत पवन के शान्त हो जाने से
वे टूटकर आकाश से गिर जाने लगे