Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 73, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
असत्यामेव तामन्तर्भावयन्स्वप्नवत्स्वतः ।
ततः स ब्रह्मशब्दार्थं वेत्ति चिद्रूपतां तताम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
वह परमाणुरूपता असत्य ही है, फिर भी उसकी
अपने अन्दर स्वप्न के समान पहले भावना करता है, फिर अपने में ब्रह्मशब्दार्थ की भावना करता
है यानी मैं ही सबको बढानेवाला हूँ, यों भावना करता है और साथ-साथ में अपनी असीम चिद्रूपता
की भी भावना करता है