Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 73, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
चिद्भावशून्य एवातिनिराकारोऽप्यणुं तनुम् ।
पश्यन्दृश्यमिवोदेति द्रष्टेव च तदा द्विताम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
यद्यपि यह
चितिरूप आकाश शून्यरूप है यानी आकार से एकदम ही रहित है, फिर भी अपनी अणुरूप तनुता
(क्षीणता) जब देखता है, तब दृश्य-सा एवं द्रष्टा-सा बनकर द्वैतभाव धारण करता है