Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 73, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
चिदणुर्यत्र भातोऽसौ देशो मितिमुपागतः ।
यदा भातस्तदा कालो यद्भानं तत्क्रिया स्मृता ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
उसकी जो विभागकल्यना हुई; उसमें प्रकार बतलाते हैं /
जहाँ यह चितिरूप अणु प्रतीत हुआ, वहाँ देश का भी भान हो ही गया तथा जब उसका भान
हुआ, तब काल भी उसमें आ गया और जो ज्ञान हुआ, तो वह क्रिया हो गई