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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 73, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

एवंस्थिते तु यत्सत्यं तत्सर्वं बुद्धवानहम् । तथापि भूयोबोधाय सर्गानुभव उच्यताम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

मायाशबल (युक्त) ब्रह्म की महिमा के स्रद्ृश मैने माया के अधिष्ठानभूत निर्विशेष, नित्ययुक्त बह्मतत्व भी जान लिया हैं, यह कहते हैं / हे महाराज, यद्यपि वस्तुस्थिति एेसी है और जो कुछ सत्य वस्तु है उसे पूरी तरह से मैंने जान भी लिया है, तथापि विपुल बोधार्थ फिर मुझसे सृष्टि का अनुभव (अध्यारोप) कैसे होता है, यह आप कहिए