Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 56
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 73, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
चितिस्तस्याद्यबीजस्य पूर्वमेव यथोदिता ।
तथैवाद्यापि जीवेऽन्तस्तथोदेति तदीहिता ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे आद्य बीज हिरण्यगर्भ की इच्छारूप चिति पहले ही
उत्पन्न हो गई, वैसे ही आज भी उसकी इच्छित चिति ही प्रत्येक जीव के भीतर उदित हो रही है ।
कहने का तात्पर्य यह है कि जैसे एक प्रथम बीज से अनेक वृक्ष तथा बीजों की परम्परा उदित होती
है वैसे ही हिरण्यगर्भरूप चेतन की इच्छा से प्रत्येक जीव से ब्रह्माण्डपरम्परा उदित होती है