Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 55
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 73, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 55
संस्कृत श्लोक
प्रतिच्छन्द्याद्यदेतस्मादुत्थिता जगदात्मना ।
देहास्तदा यथा बाह्यमन्तरेषां तथा स्थितम् ॥ ५५ ॥
हिन्दी अर्थ
इनसे
उत्पन्न प्रत्येक जीव की इच्छा से प्रकटित हुए जो जगद्रूप से अनेक देह हैं उनके कभी बाहर और
भीतर ये ठीक वैसे ही स्थित हैं