Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 73, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
प्रतिच्छन्दशरीराणां प्रथमं बीजमेष सः ।
जगद्गतानां सर्वेषामाकल्पव्यवहारिणाम् ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
जगत् के अन्दर कल्पपर्यन्त व्यवहार करनेवाले समस्त जीवों में
प्रत्येक जीव भेद की इच्छा से कल्पित व्यष्टिशरीरों के प्रथम बीज यही ब्रह्मदेव हैं