Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 73, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
प्राणापानपरावर्तदोला तदुदरोदिता ।
वातस्कन्धाभिधां धत्ते जगत्तद्धृदयं महत् ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके उदर में जनित जो प्राण तथा अपान के आवर्तरूपी झूला
है, वही उसकी उदरता वातस्कन्ध संज्ञा को धारण करती है । महान् जगत् उसी का हृदय
(हृदयगत् अस्थि आदि) है