Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 58
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 73, verse 58 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 58
संस्कृत श्लोक
तस्यास्थीन्यद्रिजालानि मेदसो जातिका घनाः ।
शिरः पादौ त्वचं देहान्पश्यामस्तस्य नो वयम् ॥ ५८ ॥
हिन्दी अर्थ
के कारण हम लोग नहीं देख पाते