Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 74, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 74 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
कुक्षयः ककुभः शून्या यकृत्प्लीहादयोऽचलाः ।
मृद्व्यः स्निग्धाः पटाकारा मेदसो जालिका घनाः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
शून्य दिशाएँ उसके कूक्षिभाग हैं, सभी पर्वत उसके यकृत-
प्लीहादि हैं और मेघसमूह उसके कोमल तथा चिकने पटाकार चर्बी के समूह हैं