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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 74, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 74 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

तस्य तान्येव कार्याणि जगतां यानि कानिचित् । संकल्पा एव पुंवृत्त्या चलन्त्यारूपितद्विताः ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

यही कारण हैं कि सम्पूर्ण जग्रत्‌ की करिया भी उसी की किया है, इसलिए किया के विष्य में अलग प्रश्न करना ठीक नहीं है, यह कहते हैं / संसार के जो कुछ कार्य हैं वे सबके सब एकमात्र उसी के कार्य हैं अर्थात्‌ संसार की सम्पूर्ण क्रियाएँ उसी की क्रिया हैं, क्योंकि ब्रह्मा के संकल्प ही सब जीवों के रूप से अपने में भेद का आरोप करके जगत्‌ के समस्त व्यवहार के रूप में चलते हैं