Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 74, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 74 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
जगद्ब्रह्मा विराट् चेति शब्दाः पर्यायवाचकाः ।
संकल्पमात्रमेवैते शुद्धचिद्व्योमरूपिणः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
जगत्, ब्रह्मा ओर
विराट्-ये तीनों एक अर्थ के वाचक शब्द हैं तथा ये दोनों यानी विराट् और जगत् शुद्ध
चिदाकाशरूप परमात्मा के संकल्प मात्र ही है (0)