Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 74, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 74 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
द्यौस्तालु विपुलं तस्य तारारुधिरबिन्दवः ।
संविद्वातलवा देहे सुरासुरनरादयः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
अन्तरिक्ष उस विराट् पुरुष का विशाल तालु है,
तारागण रूधिर के विन्दु हैं तथा देह में सुर, असुर और नर आदि बुद्धि तथा प्राण की वृत्तियों
के भेद हैं