Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 74, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 74 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
दूरं विमुक्तयोः संधिः खण्डयोरिति विस्तृता ।
अनन्ता व्योमलेखा सा श्यामा शून्येति दृश्यते ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
बहुत दूर विभक्त हुए उन
कपालखण्डं की अति विस्तृत जो मध्य सन्धि है वह अनन्त-शून्य श्यामवर्णं आकाश की रेखा
के रूप में लोगों को दिखाई देती है