Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
महाकुहकुहाशब्दं क्वथत्सप्ताब्धिडम्बरम् ।
सज्वालोल्मुकनीरन्ध्रलोकान्तरपुरान्तरम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, वहाँ मैने महाकुहकुह शब्दों से युक्त
सातों समुद्र को खूब खौलाकर काढ़ा बना रहे तथा ज्वालासहित उल्मुकं से सारे लोक और समस्त
नगरों के भीतरी भाग को अच्छी तरह परिपूर्ण कर देनेवाले बारह सूर्य समूह को देखा