Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
ज्वालाघनपटाटोपसिन्दुरीकृतपर्वतम् ।
दीप्यमानमहागारस्थिरविद्युत्ककुत्पटम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
उस
सूर्यमण्डल ने ज्वालासदृश घन रक्तवस्त्राडम्बरों से सारे पर्वतो को सिन्दुरी रंग का कर दिया था
तथा देदीप्यमान लोकपालों के घरों में स्थिर बिजली की तरह उसने समस्त दिशामण्डल को बना
दिया था