Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
विदलद्दग्धदिग्दन्तिदन्तोत्तम्भितभूधरम् ।
धराधरदरीरन्ध्रधूममण्डलकुण्डलम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, मैंने बारह आदित्यं का वह समुदाय
देखा, जो विदलित हो रहे तथा दग्ध हो चुके दिग्गजों के दाँतोंरूपी खम्भों से दिगन्तपर्वतोँ को
अधोभाग में धारण कर रहा था तथा पर्वतो की कन्दराओं के छिद्रों को धूप्रमण्डलों से कुण्डलमय
बना रहा था यानी परिपूर्ण कर रहा था