Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
आक्रन्दरोदनश्रान्तमूर्धनिःसरणामरम् ।
नागलोकज्वलज्ज्वालापातालोत्तप्तभूतलम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, उस समय कुछ लोग जोर-शोर से खूब चिल्लाने तथा
रोने से थक गये थे एवं कुछ योगी लोग उस समय ब्रह्मरन्ध्र को फाडकर उसके द्वारा अपने प्राणों को
निकाल देने से अमर भी हो चुके थे । स्वर्गलोक में जलती हुई ज्वालाओं द्वारा पातालपर्यन्त सारा
भूतल उस समय खूब सन्तप्त हो रहा था