Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
ज्वालाः श्वभ्राद्रिभूमीनां गुहाभ्यः परिनिर्ययुः ।
ज्वालोदरस्था अरुणाः समस्ता भूतजातयः ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
उत्तम गर्तो से युक्त पर्वतभूमियों की गुफाओं से
खूब ज्वालाएँ निकलने लगीं । उन ज्वालाओं के उदर मेँ स्थित समस्त भूत जातियाँ लाल रंग की
हो गई