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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

सूर्यं याम्ये ककुब्भागे सूर्यमग्निककुष्मुखे । सूर्यमैन्द्रककुब्भागे सूर्यमीशानदिङ्मुखे ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर दक्षिण दिशा में, उसके बाद अग्निकोण में, फिर पूर्वदिशा की ओर, उसके बाद पुनः मैंने ईशानकोण में उदित हुए-इस तरह भिन्न-भिन्न सूर्य मैंने देखे