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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

कुबेरककुभि सूर्यं सूर्यं वायव्यदिक्तटे । सूर्यं वरुणदिग्भागे तेन विस्मयवानहम् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, उसके वाद उत्तरदिशा में, वायव्यकोण में तथा पश्चिम दिशा में भिन्न -भिन्न सूर्यदेव भगवान्‌ को देखकर मैं आश्चर्यचकित हो गया