Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
यावद्विचारयाम्याशु विधिवैधुर्यमाकुलम् ।
उदभूद्भूतलात्तावदर्क और्व इवार्णवात् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
इतने में व्याकुल होकर ज्यों ही मैं दैव की प्रतिकूलता को विचारने लगा त्यों ही झट
भूतल से सूर्य ऐसे प्रादुर्भूत हुआ, जैसे सागर से और्व-बड़वानल