Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
वलज्ज्वालाब्जमलिनं दृष्टं सर इवाम्बरम् ।
खेऽद्रीणां शिखरे व्योम्नि शिखाशिखरशेखराः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्वालारूपी चूडामणि से अलंकृत तथा घूम्रों के आवर्त एवं धूमकेतु नामक
उत्पातविशेषरूपी केशपाशो से भूषित मृत्युरूपी नर्तकी (वेश्याएँ) पर्वतो की कन्दराओं तथा शिखरो
पर एवं पर्वतादि से शून्य आकाशप्रदेश मे भी करुणादि रस से शून्य होकर नाचने लगीं