Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
शनैरीषदिव क्षुब्धैः सह्योऽसह्यत्वमाययौ ।
मध्यमध्यकचत्कार्ष्ण्यभ्रमद्धूमालिमालितम् ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
बीच-बीच में जिनकी कुछ कालिमा प्रकाशित हो जाती थी ऐसे धूम्ररूपी
भ्रमरो से मालित तथा धूम्रसंवलित ज्वालारूपी कमलों से मलिन हुआ आकाश सरोवर के तुल्य
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