Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
उदयास्तमयादिभ्यो विन्ध्यो विधुरतामगात् ।
अङ्गारकल्पविटपैर्ज्वालावनविवल्गनैः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
तथा दक्षिण देश में सघनात्मक पर्वत भी
ज्वालायुक्त वनों की गर्जनासहित अंगार के समान क्षुब्ध हुए वृक्षों से कुछ धीरे से मानों असह्यता
को प्राप्त हो गया