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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 44

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 44

संस्कृत श्लोक

हृत्प्रकोष्ठे जगल्लक्ष्म्याः सौवर्णीवाभवत्तदा । शैलाश्चटचटास्फोटैर्वृक्षाः कटकटारवैः ॥ ४४ ॥

हिन्दी अर्थ

उस समय सभी पर्वत चटचटा शब्दों, सभी वृक्ष कटकट शब्दों तथा सभी देश हलहला शब्दों के साथ अच्छी तरह विदलन को प्राप्त हो गये