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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 49

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

दिशो दशापि वैवश्यं ययुरुन्मत्तवृत्तयः । काञ्चनद्रवसाद्रीन्द्रद्रुमागारगुहागृहः ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

समीप के अनेक पर्वतो, इन्द्र, कल्पद्रुम, आगारों तथा गुहागृहों के सहित, सुन्दर आकारवाला सुवर्णद्रवरूप सुमेरु पर्वत उस समय धीरे से ऐसे गल गया, जैसे धूप में हिम