Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
शनैश्चार्वाकृतिर्मेरुरासीद्धिम इवातपे ।
क्षणेनैवानलात्तस्माद्धिमवाञ्जतुवद्द्रुतः ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
सम्पूर्ण शीतल अन्तःकरण से युक्त एवं शुद्ध हिमालय पर्वत
तो उस प्रलय आग से एक ही क्षण में लाह के सदृश ऐसे पिघल गया, जैसे दुर्जन से सज्जन