Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
चन्दनं दग्धमप्यासीदानन्दायैव जीवताम् ।
न कदाचन संयाति वस्तूत्तममवस्तुताम् ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
उत्तम वस्तु कभी
भी अवस्तुता को यानी निकृष्टता को नहीं प्राप्त होती, (देखिये) प्रलयकालीन अग्नि से जल रहा
भी सोना सर्वथा नाश को नहीं प्राप्त हुआ