Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 62
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 62
संस्कृत श्लोक
बभूवुर्व्योमविकसत्स्थूलपद्मवना इव ।
सर्गः कदाचिदेवासीदित्यगात्स्मरणीयताम् ॥ ६२ ॥
हिन्दी अर्थ
“कभी तो सृष्टि अवश्य रही ही होगी” इस प्रकार सृष्टि स्मरणीय दशा को प्राप्त हो
गई । मूर्खो को जगत् की असारता का स्मरण दिलाते हुए कल्पान्त प्रत्यक्ष आ गया