Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 76, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
यावन्न क्वचिदेवात्र पश्याम्याशासु केवलम् ।
तरन्ति तरलास्फालमुल्मुकाशनिवृष्टयः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
मैंने उन दिशाओं में मेघ नहीं देखे, किन्तु केवल यही देखा कि उनमें तरल एवं
आस्फालित उल्मुकरूपी वज़ों की वृष्टियाँ हो रही हैं