Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 76, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
तेन ज्वलनतापेन बहुयोजनकोटिषु ।
पदार्था भस्मतां यान्ति दूरे दिक्षु दशस्वपि ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
उस अग्नि के ताप से दसों दिशाओं
में भी अनेक करोड़ों योजन दूर तक के सारे पदार्थ भस्म हो रहे हैं