Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 76, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
अनन्तरं क्षणाद्व्योम्नि दूरेऽहमनुभूतवान् ।
ऊर्ध्वतः शीतलं वातमधस्तादनलोपमम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर मेने क्षणभर
में अतिदूर आकाश में ऊपर से शीतल वायु का और नीचे अग्नि के सदृश गरम वायु का त्वचा
से अनुभव किया