Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 76, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 16
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हिन्दी अर्थ
आकाशमार्ग में वे मेघ इतने दूर प्रदेश में स्थित थे कि उस प्रदेश
में न तो नीचे के अग्निताप ही जा सकते थे ओर न उसे जीवित प्राणी ही अपनी आँखों से
देख सकते थे