Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 76, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
तेन ज्वालाचलाः प्रान्तोड्डीनाङ्गारविहंगमाः ।
लोलोल्मुकवनाक्रान्ता जग्मुरग्निदिशं द्रुतम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
उस वायु के द्वारा
अगल-बगल उड़ रहे अंगाररूपी पक्षियों से युक्त ज्वालारूपी पर्वत आग्नेय दिशा की ओर
तत्काल जाने लगे, चंचल लुआठे ही उनमें जंगल प्रतीत हो रहे थे