Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 76, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
संध्याभ्रसदृशाकारास्तेरुरङ्गारवारिदाः ।
भ्रेमुर्भस्मभराभ्राणि पूताङ्गाररजांसि खे ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
आकाश मण्डल में
सन्ध्या काल के अभ्रं के सदृश आकारवाले अंगाररूपी मेघ बरस रहे थे तथा उसमें भस्मसमूहरूपी
जलधारी मेच एवं वायु से शोधित अंगारों की धूलि उड़ रही थी