Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 76, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
स ज्वालविलसद्वातो दुष्टोऽनलदृशं व्रजन् ।
हेमाद्रीणां सपक्षाणामनीकं द्रवतामिव ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, वह अग्निज्वाला
के साथ विलासकारी वह दुष्ट वायु अग्निदिशा की ओर ऐसे जाता था जैसे पंखसहित हेमाद्रि
आदि पर्वतो का समूह