Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 76, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
धराद्रिमण्डलाभोगे सौम्याङ्गारभरात्मनि ।
ज्वालावलिगणे जाते भाते तेजसि भास्वताम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, जब अतिविस्तृत भूमण्डल ज्वालारहित अंगारों का ढेर बन गया, तथा ज्वाला
की पंक्तियों का समूह धूलिशून्य होने के कारण चमकते हुए बारह सूर्यो का स्पष्ट तेजरूप बन
गया (तब कल्पान्त का मेघ भी आ धमका)