Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 76, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मलोकस्थनाथेषु ब्रह्मलोकपुरेषु च ।
साङ्गनाबालवृद्धेषु दग्धेषु निपतत्सु खम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जब भार्या, बालक एवं वृद्धो के साथ ब्रह्मलोकस्थ अधिपति तथा ब्रह्मलोक के नगर
जलकर आकाश में गिरने लगे (तब कल्पान्त के मेघ आने लगे)