Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 76, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
अग्निदाहवनाकाशविद्युदुन्मेषभीषणा ।
चटद्गडगडास्फोटस्फुटद्ब्रह्माण्डमण्डला ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, यह वृष्टि
अग्निदाह के सदृश वन तथा आकाशमण्डल मे विद्युत के प्रकाश से अतिभीषण लग रही थी, तथा
अपनी चटचटाहट एवं गड़गड़ाहट से सारे ब्रह्माण्ड को तोड़ रही थी