Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 76, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
प्रथितोत्थितसीत्कारशतक्ष्वेडाक्षयारवा ।
शीतसीकरनीहारभित्तिबन्धमयाम्बरा ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
उत्पन्न हुए अनेक
महान् सीत्कार के सैकड़ों शब्दां से उसने सिंहनाद के शब्दां को भी मात कर दिया था ओर शीतल
जलकण एवं नीहार से उसने आकाश को भी भित्तिबन्धनमय बना दिया था