Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 76, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
रोदोमण्डपवैदूर्यस्तम्भसंभारभासुरैः ।
धारासारैर्धराधुर्यशैलशातकशालिनी ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, पृथ्वी एवं
आकाशरूप मण्डप के लिए निर्मित वैदूर्यमणि के (लहसुनियों के) स्तम्भो के समूह के सदृश भासुर
धारासम्पातों से वह पृथ्वी का भार ढोनेवाले पर्वतो को भी तोड़ देनेवाला टंक-प्रहार कर रही
थी