Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 76, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
धराचटचटास्फोटस्फुटदङ्गारपत्तना ।
गर्जितोर्जितसंपातपतल्लोकान्तराकुला ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
पृथ्वी को चट-चट शब्द के साथ विदारित करने के कारण उसने अंगारों के समूह भी
फोड़ दिये थे । गर्जना के साथ प्रबल जल के पातां से लोकान्तरों को गिराने में भी वह व्याकुल हो
रही थी