Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
तापिच्छपत्रवृन्दस्थपुष्पगुच्छसमोपमैः ।
तपद्भिरर्कैरालीढपीठकल्पाभ्रमण्डलम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय त्रिलोकी में जो कल्पान्त मेघ बरस रहे थे, उन मेघो
के आधार-पीठका तमालवृक्ष के पत्तों के नीचे लगने वाले पुष्पगुच्छों के सदृश तप रहे सूर्य मानों
आस्वाद ले रहे थे