Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
पुरमण्डलदैत्याग्निसुरनागविवस्वताम् ।
निकुरम्बं दधद्व्योम्नि मशकानामिवोच्चयम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय त्रैलोक्य आकाशमण्डल में नगर, जिले, दैत्य, अग्नि,
असुर, नाग एवं आदित्यो के समूहों को -ऐसे धारण कर रहा था, जैसे मच्छरों के समूह को