Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
कृतकर्कशनिर्ह्रादैरसुंरैरिव मारुतैः ।
उह्यमानवनव्यूहप्रोतवातायनैर्वृतम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
असुरो के समान घोर कर्कश
शब्द करनेवाले वायुओं के द्वारा उड़ाये जा रहे वन समूह में संसृष्ट शीघ्रगति घोडे आदि से सारा
जगत् आवृत हो गया