Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

वातोद्व्यूहगिरिव्रातगुहाभांकारभासुरम् । पतद्भिर्विहितावर्तलोकपालपुरीपुरैः ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण जगत्‌ कल्पान्त के प्रचण्ड पवनों के संगठनों से उत्पन्न पर्वतो की गुफाओं के भांकार शब्दों से भासुर तथा गिर रहे वर्तुलाकार मेँ परिणत लोकपाल नगरों एवं अन्य नगर से पूर्ण हो गया