Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 37
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
शाम्यच्छमशमाशब्दशतशाखहुताशनम् ।
चलाब्धिवलनान्दोललोलशैललसत्तटम् ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय जगत् में अनेक शाखा-प्रशाखाओं में विभक्त
अग्नि शमशम शब्दपूर्वक शान्त हो रही थी और चंचल समुद्रो के विविध विचलन-आन्दोलनों से
लोल हुए पर्वतो के कारण जगत् के तट सुशोभित हो रहे थे