Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
वर्षशाम्यद्हुताशोत्थभस्मामोदपतत्सुरम् ।
भूतपूर्वजगद्भूतं परिविस्मृतसर्गकम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, उस समय त्रिलोकी में वृष्टि शान्त हो जाने के कारण अग्नि
से उत्पन्न भस्म की गन्ध से देवगण गिरने लग गये और पहले उसमें जो चराचर भूतगण थे उनकी
इस समय तो विस्मृति ही होने लगी